logo

गीत मेरे: NBSE Class 10 Alternative Hindi (हिन्दी)

Leave a Comment

post

Get notes, summary, questions and answers, MCQs, extras, and PDFs of Chapter 4 “गीत मेरे (Geet Mere)” which is part of Nagaland Board (NBSE) Class 10 Alternative Hindi answers. However, the notes should only be treated as references and changes should be made according to the needs of the students.

If you notice any errors in the notes, please mention them in the comments

सारांश (Summary)

कविता “गीत मेरे” (Geet Mere) हरिवंश राय ‘बच्चन’ (Harivansh Rai ‘Bachchan’) द्वारा लिखी गई है, जिसमें कवि ने अपने गीत को “देहरी का दीप” बनाने की आकांक्षा प्रकट की है। देहरी पर रखा दीपक घर के अंदर और बाहर, दोनों जगह उजाला करता है। इसी तरह, कवि चाहता है कि उसका गीत भी ज्ञान का प्रकाश फैलाए, जो न केवल उसके जीवन में बल्कि पूरे संसार में फैले।

कवि का मानना है कि उसके हृदय में एक दुनिया है, जो अंधकार से घिरी हुई है, लेकिन वह यह भी देखता है कि बाहर की दुनिया भी अंधकार में डूबी हुई है। इसीलिए, कवि चाहता है कि उसका गीत दीपक की तरह बन जाए, जो हर दिशा में रोशनी बिखेरे। वह अपने जीवन की पूरी ऊर्जा अपने गीत में लगाने और उसे संवारने के लिए तत्पर है, ताकि संसार भी इस ज्योति से आलोकित हो सके।

कवि कहता है कि जब उसके भीतर का अंधकार दूर हो जाएगा, तभी विश्व में भी प्रकाश फैलेगा। यह दीपक केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी लौ का एक छोटा कण भी अनंत तक फैल सकता है। इस प्रकार, कवि का गीत उस दीपक की तरह हो, जो अंधकार को मिटाकर प्रकाश का प्रसार करे।

कवि को यह विश्वास है कि जब वह खुद प्रकाशमय होगा, तब संसार में अंधेरा नहीं रहेगा। इसी विश्वास और संकल्प के साथ कवि अपने गीत को देहरी के दीप की तरह बनाने की कामना करता है। कविता में ‘कालिमा’ और ‘लालिमा’ जैसे रूपक (metaphors) का प्रयोग किया गया है, जहाँ कालिमा अंधकार और लालिमा प्रकाश के प्रतीक हैं।

पंक्ति दर पंक्ति (Line by line) स्पष्टीकरण

गीत मेरे देहरी के दीप-सा बन।

कवि अपने गीत को एक दीपक की तरह बनाने की इच्छा जताता है, जो देहरी पर रखा हो और घर के अंदर और बाहर दोनों तरफ रोशनी फैलाए। यहां ‘देहरी’ प्रतीक है सीमाओं का, और ‘दीप’ प्रतीक है ज्ञान और उजाले का। कवि चाहता है कि उसका गीत घर (समाज) और बाहर की दुनिया में प्रकाश फैलाए।

एक दुनिया है हृदय में मानता हूँ / वह घिरी तम से इसे भी जानता हूँ

कवि कहता है कि उसके हृदय के भीतर भी एक अलग दुनिया है, जिसका वह स्वीकार करता है। वह यह भी जानता है कि यह दुनिया अंधकार से घिरी हुई है। यहां ‘हृदय की दुनिया’ उसके मन और भावनाओं का प्रतीक है, और ‘तम’ अंधकार का, जो निराशा या अज्ञानता का प्रतीक हो सकता है।

छा रहा है किन्तु बाहर भी तिमिर-घन;

कवि आगे कहता है कि सिर्फ उसके भीतर ही नहीं, बल्कि बाहर की दुनिया में भी घना अंधकार फैला हुआ है। यहां ‘तिमिर-घन’ का अर्थ है घना अंधेरा, जो संसार में फैले अज्ञानता और अवसाद की ओर इशारा करता है।

गीत मेरे देहरी के दीप-सा बन।

कवि फिर से अपने गीत को दीपक जैसा बनने की प्रार्थना करता है, ताकि वह इस अंधकार को दूर कर सके।

प्राण की लौ से तुझे जिस काल बारूँ / और अपने कण्ठ पर तुझको सँवारूँ

कवि अपने गीत से कहता है कि जब वह इसे अपने प्राण (जीवन शक्ति) की लौ से प्रकाशित करेगा और अपने कंठ (गले) से गाकर उसे संवार (सजाएगा), तब यह विशेष रूप लेगा। यहां कवि का मतलब है कि जब वह अपनी पूरी ताकत और समर्पण से गीत गाएगा, तब उसका प्रभाव अधिक होगा।

कह उठे संसार आया ज्योति का क्षण;

कवि उम्मीद करता है कि जब उसका गीत पूरी शक्ति से गाया जाएगा, तब पूरा संसार कह उठेगा कि प्रकाश का समय आ गया है। ‘ज्योति का क्षण’ का अर्थ है वह समय जब अंधकार दूर होगा और ज्ञान, खुशी, और आशा का प्रकाश फैलेगा।

गीत मेरे देहरी के दीप-सा बन।

यहां फिर से कवि अपने गीत को एक दीपक बनने की प्रार्थना करता है, ताकि यह संसार में उजाला फैला सके।

दूर कर मुझमें भरी तू कालिमा जब / फैल जाये विश्व में भी लालिमा तब

कवि कहता है कि जब उसके अंदर भरी ‘कालिमा’ (अंधकार, बुराई, अवसाद) दूर हो जाएगी, तभी यह लालिमा (प्रकाश, खुशी, ज्ञान) पूरे विश्व में फैल सकेगी। यहां ‘लालिमा’ उज्ज्वल भविष्य और शांति का प्रतीक है।

जानता सीमा नहीं है अग्नि का कण;

कवि कहता है कि वह जानता है कि अग्नि का एक छोटा कण भी असीम शक्ति रखता है। इसका अर्थ है कि छोटी-सी ज्योति या प्रयास भी बड़े परिवर्तन ला सकता है।

गीत मेरे देहरी के दीप-सा बन।

कवि फिर से कहता है कि उसका गीत दीपक की तरह बने और अंधकार मिटाए।

जग विभामय तो न काली रात मेरी / मैं विभामय तो नहीं जगती अँधेरी

कवि कहता है कि अगर दुनिया में रोशनी फैल जाए तो उसकी रात (उसका अंधकार) काली नहीं रहेगी। इसके विपरीत, अगर वह स्वयं प्रकाशमान हो जाए, तो दुनिया भी अंधेरे में नहीं रहेगी। यहां कवि व्यक्तिगत और सामूहिक बदलाव की बात करता है—यदि एक व्यक्ति ज्ञान और सकारात्मकता से भरेगा, तो पूरी दुनिया में परिवर्तन होगा।

यह रहे विश्वास मेरा यह रहे प्रण;

कवि कहता है कि यही उसका विश्वास और प्रण (संकल्प) रहेगा कि वह अपने गीत से उजाला फैलाएगा और अंधकार को दूर करेगा।

गीत मेरे देहरी के दीप-सा बन।

अंत में कवि फिर से अपने गीत को दीपक बनने की प्रार्थना करता है, जो अज्ञानता और निराशा के अंधेरे को मिटाकर ज्ञान और शांति का प्रकाश फैलाए।

पाठ्य प्रश्न और उत्तर (textual questions and answers)

अभ्यास प्रश्न

निम्नलिखितं प्रश्नों के उत्तर दीजिये

1. कवि गीत से क्या चाहता है ?

उत्तर: कवि अपने गीत से यह चाहता है कि उसका गीत देहरी के दीप के समान बनकर उसके जीवन में तथा संसार में ज्ञानरूपी प्रकाश फैलाए।

2. कवि के हृदय की दुनिया कैसी है ?

उत्तर: कवि के हृदय की दुनिया तम से घिरी हुई है।

3. कवि अपने गीत को देहरी का दीप क्यों बनाना चाहता है ?

उत्तर: कवि अपने गीत को देहरी का दीप इसलिए बनाना चाहता है क्योंकि जैसे देहरी पर रखा दीपक घर के भीतर और बाहर दोनों ओर उजाला फैलाता है, उसी प्रकार कवि चाहता है कि उसका गीत संसार के अंधकार को मिटाकर प्रकाश फैलाए।

4. विश्व में लालिमा कब फैलेगी ?

उत्तर: विश्व में लालिमा तब फैलेगी जब कवि के अन्दर की कालिमा दूर हो जाएगी।

सही उत्तर चुनिये

जग विभामय कब होगा ?

(क) जब सवेरा हो जायगा ।
(ख) जब दीपक जल जायगा।
(ग) जब काली रात बीत जायगी ।
(घ) जब व्यक्ति स्वयं प्रकाशमय हो जायगा।

उत्तर: जब व्यक्ति स्वयं प्रकाशमय हो जायगा।

निम्नलिखित पद्यखण्डों की सन्दर्भ सहित सप्रसंग व्याख्या कीजिये

(क) “प्राण की लौ से तुझे जिस काल बारूँ
और अपने कण्ठ पर तुझको सँवारूँ”

सन्दर्भ: यह पंक्तियाँ हरिवंश राय ‘बच्चन’ द्वारा रचित कविता “गीत मेरे” से ली गई हैं।

प्रसंग: इन पंक्तियों में कवि अपने गीत को दीपक के समान बनाकर संसार में उजाला फैलाने की इच्छा व्यक्त कर रहा है।

व्याख्या: इन पंक्तियों में कवि अपने गीत को प्राणों की लौ से प्रकाशित करने की इच्छा प्रकट कर रहा है। कवि मानता है कि जब वह अपने गीत को पूरी प्राणशक्ति से गाएगा, और उसे अपनी आवाज़ में संवारकर प्रस्तुत करेगा, तब संसार में प्रकाश का क्षण आ जाएगा। वह गीत केवल एक साधारण स्वर नहीं होगा, बल्कि एक ऐसा संदेश होगा जो अंधकार को मिटाकर चारों ओर ज्ञान और जागरूकता फैलाएगा। कवि यहाँ यह विश्वास प्रकट करता है कि उसका गीत ज्ञानरूपी प्रकाश की तरह संसार को आलोकित करेगा और हर व्यक्ति के जीवन में उजाला लाएगा।

(ख) “जग विभामय तो न काली रात मेरी,
मैं विभामय तो नहीं जगती अँधेरी.”

सन्दर्भ: यह पंक्तियाँ हरिवंश राय ‘बच्चन’ द्वारा रचित कविता “गीत मेरे” से ली गई हैं।

प्रसंग: इन पंक्तियों में कवि आत्मज्ञान और विश्वज्ञान के आपसी सम्बन्ध को दर्शा रहा है।

व्याख्या: इन पंक्तियों में कवि यह स्पष्ट कर रहा है कि जब तक उसके भीतर अंधकार है, तब तक संसार भी अंधकारमय रहेगा। वह यह कहता है कि जब तक उसकी खुद की काली रात समाप्त नहीं होती, तब तक विश्व विभामय नहीं हो सकता। इसी प्रकार, यदि वह स्वयं प्रकाशमय हो जाए तो विश्व को भी अंधकार से मुक्ति मिल सकती है। कवि का यह संदेश है कि बाहरी संसार में उजाला लाने के लिए पहले अपने भीतर के अंधकार को दूर करना आवश्यक है। यह पंक्तियाँ व्यक्ति के आत्मविकास और आत्मज्ञान की महत्ता को उजागर करती हैं, जो किसी भी बाहरी परिवर्तन की नींव होती है।

भाषा-अध्ययन

निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिये

1. आलोक

उत्तर: तम

2. जटिल

उत्तर: सरल

3. कृपण

उत्तर: उदार

4. शुक्ल

उत्तर: कृष्ण

5. मानव

उत्तर: दानव

6. तीव्र

उत्तर: मन्द

7. गुरु

उत्तर: लघु

8. चतुर

उत्तर: मूर्ख

9. चपल

उत्तर: स्थिर

10. तम

उत्तर: प्रकाश

निम्नलिखित शब्दों के दो-दो पर्यायवाची लिखिये

1. आलोक

उत्तर: प्रकाश, ज्योति

2. स्नेह

उत्तर: प्रेम, अनुराग

3. कन्या

उत्तर: बेटी, बालिका

4. ईश्वर

उत्तर: भगवान, परमात्मा

5. अहंकार

उत्तर: अभिमान, गर्व

6. घन

उत्तर: बादल, मेघ

7. संसार

उत्तर: विश्व, जगत

8. तम

उत्तर: अंधकार, तिमिर

निम्नलिखित शब्दों के अर्थ भेद करते हुए वाक्य बनाइये

1. वर्ण

उत्तर: रंग: उसका चेहरा पीले वर्ण का था।

2. मान

उत्तर: सम्मान: सभी ने उसके साहस का मान किया।

3. तनु

उत्तर: पतला: उसका शरीर बहुत तनु और कोमल है।

4. तीर

उत्तर: धनुष का बाण: उसने लक्ष्य पर सटीक तीर चलाया।

5. पानी

उत्तर: जल: हमें रोज़ कम से कम आठ गिलास पानी पीना चाहिए।

6. घन

उत्तर: बादल: आकाश में काले घन छा गए हैं।

7. उत्तर

उत्तर: प्रश्न का जवाब: शिक्षक ने सवाल का सही उत्तर दिया।

नीचे लिखे हुए हिन्दी वाक्यों का अंगेजी में अनुवाद कीजिये

1. व्यायाम स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद होता है।

उत्तर: Exercise is beneficial for health.

2. हमें बुरी आदतों का परित्याग करना चाहिए।

उत्तर: We should abandon bad habits.

3. मैं आपकी सहायता के लिए आपका कृतज्ञ हूँ।

उत्तर: I am grateful for your help.

4. उसने अपनी ग़लती को स्वीकार किया।

उत्तर: He accepted his mistake.

5. वह जैसे भी हो सन्ध्यावाली ट्रेन से आ रहा है।

उत्तर: He is coming by the evening train, no matter what.

6. दिन में सोना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है।

उत्तर: Sleeping during the day is harmful to health.

7. मैं उसकी वीरता पर आश्चर्यचकित हूँ।

उत्तर: I am amazed at his bravery.

गृहकार्य

1. न, नहीं, मत के उचित प्रयोग से वाक्यों के खाली स्थान की पूर्ति कीजिये-

(क) वे अधिक चाय पीना _____ पसन्द करते।
(ख) तुम सिगरेट _____ पीओ।
(ग) आप मेरे लिये कष्ट _____ करें।
(घ) तुम रात में अधिक देर तक _____ जागो।
(ङ) वह कल मेरे घर _____ आयी थी।

उत्तर: (क) वे अधिक चाय पीना पसन्द करते।
(ख) तुम सिगरेट मत पीओ।
(ग) आप मेरे लिये कष्ट नहीं करें।
(घ) तुम रात में अधिक देर तक मत जागो।
(ङ) वह कल मेरे घर नहीं आयी थी।

2. ‘दीप मेरे, देहरी के दीप-सा बन’ का भाव पल्लवन कीजिये।

उत्तर: कवि हरिवंश राय ‘बच्चन’ ने इस पंक्ति में अपने गीत की तुलना देहरी के दीपक से की है। जिस प्रकार देहरी पर रखा दीपक घर के भीतर और बाहर दोनों जगह प्रकाश फैलाता है, उसी प्रकार कवि चाहता है कि उसका गीत उसके निजी जीवन और सम्पूर्ण विश्व में ज्ञान और प्रकाश का संचार करे। कवि का उद्देश्य है कि उसका गीत अज्ञान और अंधकार को दूर कर सब ओर उजाला फैलाए। वह अपने गीत को प्राणशक्ति से भरकर संवारने की कामना करता है ताकि वह संसार में ज्योति का क्षण लेकर आए। इस प्रकार, कवि अपने गीत के माध्यम से आत्मज्ञान और सार्वभौमिक जागरूकता की आकांक्षा व्यक्त करता है।

अतिरिक्त (extras)

प्रश्न और उत्तर (questions and answers)

1. एक दुनिया है हृदय में, मानता हूँ,
वह घिरी तम से, इसे भी जानता हूँ,
छा रहा है किन्तु बाहर भी तिमिर-घन;
गीत मेरे, देहरी के दीप-सा बन।

उत्तर: यह पंक्तियाँ हरिवंश राय ‘बच्चन’ की कविता “गीत मेरे” से ली गई हैं, जिसमें कवि अपने गीतों को एक साधन के रूप में देखता है, जो अंधकार से भरे संसार में प्रकाश फैलाने का काम कर सकता है। कवि मानता है कि उसके हृदय में भी एक दुनिया बसी हुई है, जो अंधकार से घिरी है, और वह इस अंधकार को पूरी तरह से पहचानता है। इसके बावजूद, वह महसूस करता है कि उसके बाहर की दुनिया भी उसी तरह घने अंधकार से भरी हुई है। इस पूरे भाव में कवि ने उस द्वंद्व का वर्णन किया है, जो उसकी आंतरिक और बाहरी दुनिया में व्याप्त है। वह चाहता है कि उसके गीत उस द्वार के दीपक के समान बनें, जो चारों ओर उजाला फैला सके, चाहे अंधकार कितना ही घना क्यों न हो।

2. प्राण की लौ से तुझे जिस काल बारूँ,
और अपने कण्ठ पर तुझको सँवारूँ,
कह उठे संसार, आया ज्योति का क्षण;
गीत मेरे, देहरी के दीप-सा बन।

उत्तर: इन पंक्तियों में कवि अपने गीत को जीवन की लौ के समान देखता है, जिसे वह अपने प्राणों से प्रज्वलित करता है। जब वह गीत को अपने कण्ठ में सहेजता है और उसे गाता है, तो उसे विश्वास है कि वह क्षण संसार के लिए प्रकाश का क्षण बन जाएगा। कवि का यह विश्वास गहरे आत्मविश्वास और आशा का प्रतीक है। वह चाहता है कि उसके गीत केवल व्यक्तिगत नहीं रहें, बल्कि संसार के लिए भी प्रेरणादायक हों और चारों ओर प्रकाश फैलाएं, जैसे किसी देहरी का दीपक अपने आस-पास के अंधकार को मिटाता है।

3. दूर कर मुझमें भरी तू कालिमा जब,
फैल जाये विश्व में भी लालिमा तब,
जानता सीमा नहीं है अग्नि का कण;
गीत मेरे, देहरी के दीप-सा बन।

उत्तर: इस अंश में कवि अपने गीत को अंधकार को दूर करने वाले प्रकाश के रूप में देखता है। वह चाहता है कि उसके गीत उसके अंदर की कालिमा (अंधकार) को मिटा दें, और जब यह अंधकार हट जाएगा, तब वही उजाला पूरे विश्व में भी फैल जाएगा। कवि यहाँ आग की एक छोटी-सी चिंगारी की तुलना करता है, जो अनंत संभावनाओं से भरी होती है और उसकी कोई सीमा नहीं होती। यह दर्शाता है कि एक छोटे से प्रयास से भी बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। कवि का संदेश है कि उसके गीत उस चिंगारी की तरह बनें, जो उसके भीतर और बाहरी संसार दोनों को प्रकाशमान कर सके।

4. जग विभामय तो न काली रात मेरी,
मैं विभामय तो नहीं जगती अँधेरी,
यह रहे विश्वास मेरा, यह रहे प्रण;
गीत मेरे, देहरी के दीप-सा बन।

उत्तर: इन पंक्तियों में कवि के विचारों में अद्वैत (अलग न होना) की भावना दिखती है। कवि कहता है कि अगर जगत प्रकाशमय है, तो उसकी रात भी अंधेरी नहीं हो सकती। इसी प्रकार, अगर वह स्वयं प्रकाशमय है, तो संसार भी अंधकार में नहीं रह सकता। यह उसके विश्वास और प्रण का प्रतीक है कि उसके गीत, उसकी आत्मा और संसार के बीच संबंध स्थापित करेंगे, जिससे दोनों एक-दूसरे को प्रभावित कर सकते हैं। कवि इस सत्य में विश्वास रखता है कि उसका प्रकाश और संसार का प्रकाश एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, और इसी विश्वास के साथ वह अपने गीतों को दीपक की तरह बनाना चाहता है, जो यह प्रकाश फैलाएं।

5. यह रहे विश्वास मेरा, यह रहे प्रण;
गीत मेरे, देहरी के दीप-सा बन।

उत्तर: इस अंतिम अंश में कवि अपने दृढ़ विश्वास और प्रण को दोहराता है। वह अपने गीतों से यह आशा करता है कि वे किसी दीपक की तरह बनें, जो अंधकार में रास्ता दिखाने का काम करें। कवि के लिए उसके गीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि वे एक आध्यात्मिक और मानसिक यात्रा का प्रतीक हैं, जो उसे और दूसरों को अंधकार से निकालकर प्रकाश की ओर ले जा सकते हैं। यह उसकी आंतरिक साधना और उसकी सृजनशीलता का प्रतीक है, जिसके माध्यम से वह अंधकार के विरुद्ध संघर्ष करता है और प्रकाश की स्थापना का प्रण करता है।

6. कवि के हृदय में कैसी दुनिया है?

उत्तर: कवि के हृदय में एक दुनिया है, जो तम से घिरी हुई है। इसका उल्लेख करते हुए कवि कहते हैं कि उन्हें यह भी ज्ञात है कि उनके हृदय की दुनिया अंधकार से भरी हुई है।

7. बाहर का संसार कैसा है?

उत्तर: कवि के अनुसार, बाहर का संसार भी तिमिर-घन, अर्थात् घने अंधकार से घिरा हुआ है। वे मानते हैं कि जैसे उनके हृदय में तम है, वैसे ही बाहर भी अंधकार व्याप्त है।

8. कवि अपने गीतों को किससे तुलना करते हैं?

उत्तर: कवि अपने गीतों की तुलना देहरी के दीपक से करते हैं, जो अंधकार को दूर करने के लिए जलता है। यह दीपक तम में प्रकाश फैलाने का प्रतीक है, जैसे कवि के गीत भी अंधकार में ज्योति लाने का कार्य करते हैं।

9. गीत का दीपक कब ज्योति का क्षण लाता है?

उत्तर: कवि कहते हैं कि जब वे अपने प्राणों की लौ से अपने गीतों को बारते हैं और अपने कंठ से सँवारते हैं, तब संसार कह उठता है कि ज्योति का क्षण आ गया है।

10. कवि के अनुसार अग्नि के कण की क्या सीमा है?

उत्तर: कवि के अनुसार अग्नि के कण की कोई सीमा नहीं है। जब गीत, दीपक की तरह प्रज्वलित होता है, तो वह कवि के भीतर की कालिमा को दूर करने के साथ-साथ विश्व में भी लालिमा फैलाता है।

11. कवि किस विश्वास और प्रण को धारण करते हैं?

उत्तर: कवि इस विश्वास और प्रण को धारण करते हैं कि यदि जग विभामय हो जाए, तो उनकी रात काली नहीं रहेगी। और यदि वे विभामय हो जाएँ, तो जग भी अंधेरी नहीं रहेगी। यह विश्वास उनके गीतों का मूल संदेश है।

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

1. किस रूप में कवि अपने गीत की कल्पना करता है?

(क) दीपक
(ख) फूल
(ग) सूर्य
(घ) चाँद

उत्तर: (क) दीपक

2. कवि के अनुसार गीत किस प्रकार से प्रकाश फैलाता है?

(क) सूर्य की किरणों की तरह
(ख) दीप की लौ की तरह
(ग) अग्नि की ज्वाला की तरह
(घ) चाँदनी की तरह

उत्तर: (ख) दीप की लौ की तरह

3. कवि अपने गीत को कहाँ प्रकट करना चाहता है?

(क) विश्व में
(ख) अपने हृदय में
(ग) आकाश में
(घ) धरती पर

उत्तर: (ख) अपने हृदय में

4. गीत को किससे घिरा हुआ माना गया है?

(क) अग्नि
(ख) तम
(ग) धुआँ
(घ) प्रकाश

उत्तर: (ख) तम

5. कवि अपने गीत के माध्यम से क्या दूर करना चाहता है?

(क) पीड़ा
(ख) आलस्य
(ग) कालिमा
(घ) घृणा

उत्तर: (ग) कालिमा

6. कवि किससे यह विश्वास रखता है कि प्रकाश फैल सकता है?

(क) अग्नि के कण से
(ख) सूर्य के ताप से
(ग) चाँद की रोशनी से
(घ) हवा से

उत्तर: (क) अग्नि के कण से

7. कवि के अनुसार विश्व में लालिमा फैलने के लिए किसकी आवश्यकता है?

(क) दीपक की
(ख) सूरज की
(ग) अग्नि की
(घ) गीत की

उत्तर: (घ) गीत की

8. कवि किस समय गीत को अपने कंठ पर सँवारता है?

(क) सुबह
(ख) रात
(ग) प्राण की लौ से
(घ) अग्नि से

उत्तर: (ग) प्राण की लौ से

9. कवि को क्या विश्वास है?

(क) उसकी रात विभामय है
(ख) जग विभामय है
(ग) उसके गीत में शक्ति है
(घ) उसका गीत सीमित है

उत्तर: (ख) जग विभामय है

10. कवि का प्रण क्या है?

(क) अंधेरे को हराना
(ख) विश्वास बनाए रखना
(ग) गीत गाना
(घ) जीवन जीना

उत्तर: (ख) विश्वास बनाए रखना

Ron'e Dutta

Ron'e Dutta

Ron'e Dutta is a journalist, teacher, aspiring novelist, and blogger who manages Online Free Notes. An avid reader of Victorian literature, his favourite book is Wuthering Heights by Emily Brontë. He dreams of travelling the world. You can connect with him on social media. He does personal writing on ronism.

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Only for registered users

Meaning
Tip: select a single word for meaning & synonyms. Select multiple words normally to copy text.