वसन्त, सम्भाषण: NBSE Class 9 Alternative Hindi (हिन्दी) notes
Get notes, summary, questions and answers, MCQs, extras, and PDFs of Chapter 5 “बसन्त, संभाषण” which is part of Nagaland Board (NBSE) Class 9 Alternative Hindi answers. However, the notes should only be treated as references and changes should be made according to the needs of the students.
सारांश (Summary)
यह दस्तावेज़ दो कविताओं पर आधारित है। पहली कविता “वसन्त” (Vasant) बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ (Balkrishna Sharma ‘Naveen’) द्वारा लिखी गई है। इसमें कवि ने अपने जीवन की तुलना प्रकृति के साथ की है। कवि के अनुसार, उनका जीवन निराशा से भरा हुआ है, जैसे कि एक कैदी की तरह जीवन काट रहे हों। वह अपनी छोटी खिड़की से पीपल के पेड़ की डालियों को देख रहे हैं, जो शाम की हल्की हवा में हिल रही हैं। पीपल की सुनहरी और हरी पत्तियाँ सूर्यास्त के बाद काली पड़ जाती हैं। यह दृश्य कवि के जीवन की तरह प्रतीत होता है, जहाँ थोड़ी सी रोशनी के बाद फिर से अंधेरा छा जाता है। यहाँ, पीपल की पत्तियाँ कवि के जीवन के दुख और निराशा का प्रतीक हैं।
दूसरी कविता “सम्भाषण” (Sambhashan) भी बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ द्वारा लिखी गई है। यह कविता जेल में बैठे कवि और चाँद के बीच एक काल्पनिक संवाद है। कवि जेल की अंधेरी कोठरी में बैठे हुए हैं और चाँद को अपने साथ बातचीत के लिए बुलाते हैं। चाँद उन्हें पागल कहकर मज़ाक करता है, लेकिन कवि उससे कहते हैं कि अगर वे पागल हैं, तो चाँद भी ‘पगलों का राजा’ है। चाँद भी इस दुनिया के संघर्षों और परेशानियों में फंसा हुआ है। कवि उसे कहता है कि अगर उसे घूमना ही है, तो दिन के निकलने का इंतजार करे। यह संवाद कवि के अकेलेपन और उनकी स्थितियों का प्रतीक है, जहाँ वह चाँद को भी अपना साथी मानते हैं।
दोनों कविताओं में कवि ने अपने दुख, अकेलेपन और जीवन के संघर्षों को प्रकृति और चाँद के रूपक के माध्यम से व्यक्त किया है।
पंक्ति दर पंक्ति (Line by line) स्पष्टीकरण
वसन्त
कविते सूना है यह जीवन भारभूत नैराश्यभरा
कवि कहता है कि हे कविता, मेरा जीवन सूना और खाली है। यह जीवन बोझ से भरा हुआ और निराशा से घिरा हुआ है।
फिर भी कारा में आया है यह मधुपति कुछ डरा-डरा।
हालांकि यह जीवन निराशाजनक है, फिर भी मधुपति (मधु = मधुरता, पति = स्वामी, यानी यहाँ कवि के लिए कहा गया है) इस जेल की कोठरी में आ गया है, थोड़ा भयभीत और सहमा हुआ।
पीपल की डालें दिखती हैं मेरे छोटे जँगले से
कवि जेल की छोटी खिड़की से पीपल के पेड़ की डालियाँ देखता है।
आज साँझ को मैंने देखे उनके रंग-ढंग बदले-से।
शाम के समय कवि ने देखा कि पीपल के पेड़ की डालियों का रूप और रंग बदल गया है। यह इस बात का प्रतीक है कि समय के साथ चीजें बदलती हैं।
थिरक रही थी सान्ध्य पवन में पीपल की हर-हर डाली
शाम की हवा में पीपल की डालियाँ धीरे-धीरे हिल रही थीं। यहाँ “थिरक रही” शब्द से डालियों के हल्के हिलने का सुंदर चित्रण किया गया है।
खेल रही थीं किरणों से पत्तियाँ सुनहली-हरियाली।
पीपल की सुनहरी और हरी पत्तियाँ सूर्य की किरणों के साथ खेल रही थीं। यह दृश्य बहुत सुंदर और शांतिपूर्ण था।
डूब गया इतने में सूरज पड़ीं पत्तियाँ वे काली
तभी सूर्य अस्त हो गया, और जब सूर्य की किरणें गायब हो गईं, तो वे चमकदार पत्तियाँ काली पड़ गईं। यह जीवन के सुख और दुःख की तुलना में दर्शाया गया है।
है ऐसा मेरा जीवन छिन उजियाली फिर अँधियाली।
कवि अपने जीवन की तुलना दिन और रात से करता है। उसका जीवन भी कुछ क्षणों के लिए उजाले (सुख) में होता है और फिर तुरंत अंधकार (दुःख) में बदल जाता है।
सम्भाषण
आज चाँद ने खुश-खुश झाँका काल- कोठरी के जँगले से;
आज रात चाँद ने बहुत खुश होकर कवि की जेल की कोठरी की खिड़की से झाँका। “काल-कोठरी” का मतलब है जेल की अंधेरी कोठरी।
गोया मुझसे पूछा हँसकर कैसे बैठे हो पगले-से ?
ऐसा लगा कि चाँद हँसते हुए कवि से पूछ रहा है कि तुम यहाँ पागल जैसे क्यों बैठे हो?
कैसे? बैठा हूँ मैं ऐसे-कि मैं बन्द हूँ गगन-विहारी;
कवि जवाब देता है कि मैं इसलिए यहाँ ऐसे बैठा हूँ क्योंकि मैं आकाश में विचरण करने वाला (स्वतंत्र) था और अब यहाँ कैद में हूँ।
पागल-सा हूँ? तो फिर? यह तो कह हारी दुनिया बेचारी;
अगर मैं पागल हूँ, तो यह कोई बड़ी बात नहीं है क्योंकि दुनिया भी हार मान चुकी है और मुझे पागल मानती है।
मियाँ चाँद गर मैं पागल हूँ-तो तू है पगलों का राजा;
कवि चाँद से कहता है कि अगर मैं पागल हूँ, तो तुम पागलों के राजा हो। यहाँ चाँद को संबोधित करके एक हल्की-फुल्की बातचीत का माहौल बनाया गया है।
मेरी तेरी खूब छनेगी आ जँगले के भीतर आ जा;
कवि कहता है कि हम दोनों की खूब बनेगी। तुम भी मेरे साथ आकर इस जेल की कोठरी में बैठो, यानी वह चाँद को अपने हालात में शामिल होने के लिए कहता है।
लेकिन तू भी यार फँसा है-इस चक्कर के गन्नाटे में;
कवि कहता है कि चाँद, तुम भी इस दुनिया के चक्रव्यूह में फँसे हुए हो, यानी तुम भी पूरी तरह स्वतंत्र नहीं हो।
इसीलिए तू मारा-मारा-फिरता है इस सन्नाटे में;
इसलिए तुम भी इस सन्नाटे में इधर-उधर भटकते रहते हो, यानी तुम भी निरंतर घूम रहे हो।
अमाँ चकरघिन्नी फिरने का-यह भी है कोई मौजूँ छिन ?
कवि चाँद से सवाल करता है कि क्या यह लगातार घूमते रहना (चकरघिन्नी की तरह) कोई अच्छा तरीका है? इसमें कोई आनंद नहीं है।
गर मंजूर घूमना ही है तो तूजरा निकलने दे दिन;
अगर तुम्हें घूमना ही है, तो दिन निकलने दो ताकि तुम्हारा घूमना सही समय पर हो, यानी रात में भटकने का कोई लाभ नहीं है।
यह सुन वह आदाब बजाता-खिसक गया डण्डे के नीचे;
यह सुनकर चाँद हाथ जोड़कर आदाब करता है और धीरे से खिड़की से नीचे चला जाता है।
और कोठरी में ‘नवीन’ जी लगे सोचने आँखें मींचे।
इसके बाद कवि ‘नवीन’ जी अपनी आँखें बंद कर सोचने लगते हैं। यहाँ कवि के विचारशील और दार्शनिक दृष्टिकोण को दिखाया गया है।
पाठ्य प्रश्न और उत्तर
वसन्त (textual)
मौखिक प्रश्न
1. कवि को अपना जीवन कैसा लगता है ?
उत्तर: कवि को अपना जीवन भारभूत नैराश्यभरा लगता है।
2. कवि के दुःख से पीपल की पत्तियाँ कैसी हो गयीं ?
उत्तर: कवि के दुःख से पीपल की पत्तियाँ काली हो गयीं।
3. मधुमति किसे कहा गया है ?
उत्तर: मधुमति मधुपति को कहा गया है।
4. छोटी खिड़की से कवि को क्या दिखायी देता है ?
उत्तर: छोटी खिड़की से कवि को पीपल की डालें दिखायी देती हैं।
लिखित प्रश्न
1. पीपल के बदले -से रंग-ढंग क्या हैं ? वे क्या सूचित कर रहे हैं ?
उत्तर: पीपल के बदले हुए रंग-ढंग से सूचित होता है कि शाम के समय उसकी पत्तियाँ पहले सुनहली-हरियाली थीं, लेकिन सूरज के डूबते ही वे काली हो गईं। इससे जीवन के उजाले और अंधेरे की स्थिति का संकेत मिलता है, जहाँ खुशी और दुख साथ-साथ चलते हैं।
2. कवि ने अपने जीवन की तुलना किससे की है ? क्यों ?
उत्तर: कवि ने अपने जीवन की तुलना पीपल की पत्तियों से की है क्योंकि जैसे पीपल की पत्तियाँ पहले सुनहरी थीं और फिर अंधेरा छा जाने के बाद काली हो गईं, उसी तरह कवि का जीवन भी पहले उजियाले से भरा था, लेकिन अब वह नैराश्य और दुख से घिरा हुआ है।
3. पीपल की उजली पत्तियाँ काली क्यों पड़ गयीं ?
उत्तर: पीपल की उजली पत्तियाँ काली इसलिये पड़ गईं क्योंकि सूरज के डूबते ही रोशनी कम हो गई और अंधेरा छा गया।
4. पतझड़वाले पेड़ों में वसन्त आने के पूर्व क्या-क्या परिवर्तन होते हैं ?
उत्तर: पतझड़वाले पेड़ों में वसन्त आने से पहले पत्तियाँ झड़ जाती हैं और उनकी शाखाएँ सूनी हो जाती हैं। वसन्त के आगमन के साथ ही उनमें फिर से पत्तियाँ और नई कोंपलें फूटने लगती हैं।
5. व्याख्या कीजिये-
(क) थिरक रही थी सान्ध्य पवन में पीपल की हर-हर डाली।
खेल रही थीं किरणों से पत्तियाँ सुनहली-हरियाली । ।
उत्तर: ये पंक्तियाँ “वसन्त” नामक कविता से ली गई हैं, जिसके रचयिता बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ हैं।
इस वाक्यांश में कवि संध्या के समय पीपल के पेड़ की डालियों का वर्णन कर रहा है। सन्ध्या की हल्की-हल्की हवा में पीपल की डालियाँ हिल रही हैं, मानो वे थिरक रही हों। सूर्यास्त की किरणें पेड़ की पत्तियों पर पड़ रही हैं, जिससे पत्तियाँ सुनहरी और हरी दिखाई दे रही हैं। इस दृश्य में प्रकृति की सौंदर्यता और उसकी छटा का अद्भुत चित्रण किया गया है, जो यह दर्शाता है कि सन्ध्या के समय प्रकृति कितनी मोहक और मनोहारी हो सकती है। इन पंक्तियों में कवि ने प्रकृति के सौंदर्य को सजीव और गतिशील रूप में प्रस्तुत किया है।
सम्भाषण (textual)
मौखिक प्रश्न
1. कवि जेल की कोठरी में किससे वार्तालाप कर रहा है ?
उत्तर: कवि जेल की कोठरी में चाँद से वार्तालाप कर रहा है।
2. कवि जँगले के भीतर किसको बुला रहा है ?
उत्तर: कवि जँगले के भीतर चाँद को बुला रहा है।
3. चाँद के झाँकने पर कवि को कैसा लगा ?
उत्तर: चाँद के झाँकने पर कवि को ऐसा लगा मानो चाँद हँसते हुए उससे पूछ रहा हो कि वह पगले की तरह क्यों बैठा है।
1. चाँद कवि के जीवन पर क्यों हँसता है ?
उत्तर: चाँद कवि के जीवन पर इसलिए हँसता है क्योंकि कवि जेल में बंद है और चाँद उसकी इस स्थिति पर मज़ाक उड़ाते हुए उसे पागल कहता है।
2. दिन निकलने पर घूमने के सुझाव पर चाँद क्यों ओझल हो गया ?
उत्तर: चाँद दिन निकलने के बाद दिखाई नहीं देता, इसलिए कवि के दिन निकलने पर घूमने के सुझाव पर वह तुरंत ओझल हो गया।
3. निम्नलिखित वाक्यांशों की व्याख्या कीजिये-
(क) मियाँ चाँद गर मैं पागल हूँ-तो तू है पगलों का राजा।
मेरी तेरी खूब छनेगी आ जँगले के भीतर आ जा।
उत्तर: ये पंक्तियाँ “संभाषण” नामक कविता से ली गई हैं, जिसके रचयिता बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ हैं।
इस वाक्यांश में कवि चाँद से संवाद करते हुए कहता है कि यदि वह (कवि) पागल है, तो चाँद को पागलों का राजा होना चाहिए। कवि यहाँ व्यंग्य के माध्यम से अपनी स्थिति पर प्रकाश डालता है। वह जेल में बंद है, जबकि चाँद आकाश में स्वतंत्र रूप से घूमता है। कवि मज़ाकिया लहजे में चाँद को अपने पास, जेल की कोठरी के भीतर बुलाता है, जिससे दोनों साथ मिलकर पागलों जैसा जीवन व्यतीत कर सकें। यह वाक्यांश कवि की असहाय स्थिति और उसकी स्वतंत्रता की आकांक्षा को दर्शाता है। साथ ही, इसमें कवि ने अपनी स्थिति को चाँद की स्थिति से जोड़ा है, यह दिखाते हुए कि दोनों ही किसी न किसी रूप में बंदी हैं—कवि जेल में और चाँद आकाश में।
(ख) यह सुन वह आदाब बजाता- खिसक गया डण्डे के नीचे।
और कोठरी में ‘नवीन’ जी लगे सोचने आँखे मींचे।
उत्तर: ये पंक्तियाँ भी “संभाषण” नामक कविता से ली गई हैं, जिसके रचयिता बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ हैं।
इस वाक्यांश में कवि और चाँद के बीच के संवाद का अंत चित्रित किया गया है। जब कवि चाँद को दिन निकलने पर घूमने का सुझाव देता है, तो चाँद आदरपूर्वक कवि से विदा लेता है। ‘आदाब बजाना’ चाँद के आदरपूर्ण विदा लेने का प्रतीक है। इसके बाद चाँद धीरे-धीरे खिड़की से गायब हो जाता है। चाँद के जाने के बाद कवि आँखें बंद करके गहरे विचार में डूब जाता है। यह दृश्य कवि की गहरी चिंतनशील अवस्था को प्रकट करता है, जहाँ वह अपने जीवन, स्वतंत्रता की कमी और अपने एकाकीपन के बारे में सोचता है।
4. ‘बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ का जीवन परिचय लिखिये।
उत्तर: बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ का जन्म मध्य प्रदेश के ग्वालियर में हुआ था। वे हिंदी साहित्य के महत्वपूर्ण कवि, लेखक और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। उनकी कविताओं में राष्ट्रीयता, क्रांति और समाज के प्रति जागरूकता की भावना प्रमुख रूप से दिखाई देती है। ‘नवीन’ जी की शैली सरल और सजीव है, जिसमें उन्होंने देशभक्ति और सामाजिक मुद्दों पर अपने विचार प्रस्तुत किए हैं।
भाषा-अध्ययन
1. ‘अप’ उपसर्ग निम्नलिखित शब्दों में जोड़कर विपरीतार्थक शब्द बनाइये-
कीर्ति, मान, यश, उत्कर्ष, उपचार, शब्द
उत्तर: अपकीर्ति, अपमान, अपयश, अपकर्ष, अपचार, अपशब्द
2. ‘वि’ उपसर्ग निम्नलिखित शब्दों में जोड़कर विपरीतार्थक शब्द बनाइये-
अनुराग, क्रय, सम, रत, स्मृति, आगत, सम्पन्न, पराजय, सधवा, सफल, सजातीय, स्वधर्मी, स्मरण
उत्तर: विराग, विक्रय, विषम, विरत, विस्मृति, विगत, विपन्न, विजय, विधवा, विफल, विजातीय, विधर्मी, विस्मरण
3. आई आहट इमा ई ता प्रत्यय से नये शब्द बनाइये।
उत्तर: आई – पढ़ाई, लड़ाई
आहट – दौड़ाहट, पड़ाहट
इमा – गणिमा, प्रियमा
ई – हंसी, खुशी
ता – सरलता, गरिमा
4. नीचे लिखे अनेक शब्दों के स्थान पर एक शब्द लिखिये-
(क) जो हिंसा में विश्वास न रखता हो
उत्तर: अहिंसक
(ख) जिसका आचरण अच्छा हो
उत्तर: सदाचारी
(ग) जिसके माता-पिता न हों
उत्तर: अनाथ
(घ) जीने की प्रबल इच्छा
उत्तर: जिजीविषा
(ङ) तप करनेवाला
उत्तर: तपस्वी
(च) जो किसी पक्ष में न रहे
उत्तर: निरपेक्ष
(छ) जिसकी धर्म में निष्ठा हो
उत्तर: धर्मनिष्ठ
(ज) जिसका आधार न हो
उत्तर: निराधार
5. नीचे लिखे अंग्रेजी वाक्यों का हिन्दी में अनुवाद कीजिये।
(i) Anil’s father threw cold water upon his proposal.
उत्तर: अनिल के पिता ने उसके प्रस्ताव को ठुकरा दिया।
(ii) How are you concerned with this matter?
उत्तर: इस मामले से तुम्हारा क्या संबंध है?
(iii) He came near me but did not speak any word.
उत्तर: वह मेरे पास आया, लेकिन उसने एक भी शब्द नहीं कहा।
(iv) He must be coming by evening train.
उत्तर: वह शाम की ट्रेन से आ रहा होगा।
(v) May God help you.
उत्तर: भगवान तुम्हारी मदद करें।
(vi) Always obey your parent.
उत्तर: हमेशा अपने माता-पिता की आज्ञा का पालन करो।
(vii) The sun rises in the east.
उत्तर: सूर्य पूर्व दिशा में उगता है।
(viii) The earth revolves round the sun.
उत्तर: पृथ्वी सूर्य के चारों ओर घूमती है।
(ix) There are nine planets in our solar system. (factually incorrect)
उत्तर: हमारे सौरमंडल में नौ ग्रह हैं।
(x) Honesty is the best policy.
उत्तर: ईमानदारी सबसे अच्छी नीति है।
अतिरिक्त प्रश्न और उत्तर
वसन्त (extras)
1. कवि के अनुसार जीवन कैसा है?
उत्तर: कवि के अनुसार जीवन सूना है, भारभूत और नैराश्य से भरा हुआ है।
2. मधुपति कैसे आया है?
उत्तर: मधुपति कारा में कुछ डरा-डरा आया है।
3. कवि ने किस पेड़ की डालों का वर्णन किया है?
उत्तर: कवि ने पीपल के पेड़ की डालों का वर्णन किया है, जिन्हें वह अपने छोटे जँगले से देखता है।
4. कवि ने किस समय पीपल की डालों को देखा?
उत्तर: कवि ने साँझ के समय पीपल की डालों को देखा और उनके रंग-ढंग में बदलाव पाया।
5. साँझ के समय पीपल की डालियों में क्या हो रहा था?
उत्तर: साँझ के समय पीपल की हर-हर डाली सान्ध्य पवन में थिरक रही थी और पत्तियाँ सुनहली-हरियाली किरणों से खेल रही थीं।
6. सूरज डूबने के बाद पीपल की पत्तियाँ कैसी हो गईं?
उत्तर: सूरज डूबने के बाद पीपल की पत्तियाँ काली पड़ गईं।
7. कवि ने अपने जीवन को किसके साथ तुलना की है?
उत्तर: कवि ने अपने जीवन की तुलना पीपल की पत्तियों से की है, जो छिन उजियाली और फिर अँधियाली होती हैं।
8. कविते, सूना है यह जीवन, भारभूत, नैराश्यभरा, फिर भी कारा में आया है, यह मधुपति कुछ डरा-डरा।
उत्तर: यह पंक्तियाँ बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ की कविता “वसन्त” से ली गई हैं। इन पंक्तियों में कवि जीवन के प्रति अपने नैराश्य और उदासी को व्यक्त कर रहे हैं। उनका जीवन सूना (खाली) है, बोझिल है और निराशा से भरा हुआ है। “कारा” शब्द यहां जीवन की कठिनाइयों और बंधनों का प्रतीक है, जिसे कवि जेल या कैद के रूप में देखता है। “मधुपति” शब्द से तात्पर्य है मधुमक्खी का स्वामी, अर्थात वसन्त ऋतु का प्रतीक। कवि कहता है कि वसन्त भी उसके जीवन में डरा हुआ और निराश होकर आया है। यह पंक्ति जीवन की कठिनाईयों और आशाओं के बीच के संघर्ष को दर्शाती है।
9. पीपल की डालें दिखती हैं मेरे छोटे जँगले से, आज साँझ को मैंने देखे उनके रंग-ढंग बदले-से।
उत्तर: इन पंक्तियों में कवि उस प्रकृति का चित्रण कर रहे हैं, जिसे वे अपने छोटे से जँगले (खिड़की) से देखते हैं। पीपल के पेड़ की डालियां शाम के समय कवि को दिखाई देती हैं। कवि यहां प्रकृति में होने वाले परिवर्तन का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। पीपल की डालियों के बदलते रूप और रंगों का उल्लेख करते हुए, कवि बताते हैं कि शाम के समय प्रकृति कैसे बदल जाती है। यह दृश्य कवि के अंदर गहरे भावनात्मक परिवर्तन को भी प्रतिबिंबित करता है, जो शाम के समय प्रकृति की हलचल में उन्हें दिखाई देता है। इस दृश्य में बदलाव उनके जीवन के अस्थिरता और परिवर्तनशीलता का प्रतीक है।
10. डूब गया इतने में सूरज, पड़ीं पत्तियाँ वे काली, है ऐसा मेरा जीवन छिन उजियाली, फिर अँधियाली।
उत्तर: यह पंक्तियाँ जीवन और प्रकृति के गहरे संबंध को दर्शाती हैं। कवि यहां सूर्यास्त के दृश्य का वर्णन कर रहे हैं, जब सूर्य डूब जाता है और पीपल की पत्तियाँ काली पड़ जाती हैं। यह दृश्य कवि के जीवन के उतार-चढ़ाव का प्रतीक है। जैसे दिन के समय उजाला होता है और फिर शाम होते ही अंधेरा छा जाता है, वैसे ही कवि अपने जीवन को उजाले और अंधेरे के चक्र में फंसा हुआ महसूस करते हैं। यह पंक्तियाँ जीवन के क्षणिक सुख और दुख के अनुभवों को व्यक्त करती हैं। उजियाली (प्रकाश) और अँधियाली (अंधकार) का यह चक्र जीवन की अनिश्चितता और उसकी अस्थिर प्रकृति को उजागर करता है।
सम्भाषण (extras)
1. चाँद ने कवि से किस तरह का प्रश्न किया?
उत्तर: चाँद ने कवि से हँसते हुए पूछा, “कैसे बैठे हो पगले-से?”
2. कवि ने चाँद के प्रश्न का क्या उत्तर दिया?
उत्तर: कवि ने उत्तर दिया कि वह गगन-विहारी है और दुनिया उसे पागल कहती है, इसलिए वह ऐसे बैठा है।
3. कवि ने चाँद को क्या विशेषण दिया?
उत्तर: कवि ने चाँद को ‘पगलों का राजा’ कहा और कहा कि उनकी आपस में खूब छनेगी।
4. कवि ने चाँद को क्या निमंत्रण दिया?
उत्तर: कवि ने चाँद को कहा कि वह जँगले के भीतर आ जाए ताकि वे साथ रह सकें।
5. कवि ने चाँद की क्या स्थिति बताई?
उत्तर: कवि ने कहा कि चाँद भी फँसा हुआ है इस चक्कर के गन्नाटे में और इस सन्नाटे में मारा-मारा फिरता है।
6. कवि ने चकरघिन्नी फिरने को किस प्रकार की स्थिति बताया?
उत्तर: कवि ने कहा कि चकरघिन्नी फिरने की यह स्थिति कोई मौजूँछिन नहीं है, और चाँद को दिन निकलने का इंतजार करना चाहिए।
7. चाँद ने कवि की बात सुनकर क्या किया?
उत्तर: चाँद ने आदाब बजाया और डण्डे के नीचे से खिसक गया।
8. कवि ने किस अवस्था में शब्दार्थ पर विचार किया?
उत्तर: कवि ने अपनी कोठरी में आँखें मींचकर शब्दार्थ पर विचार किया।
9. आज चाँद ने खुश-खुश झाँका,
काल- कोठरी के जँगले से;
गोया मुझसे पूछा हँसकर
कैसे बैठे हो पगले-से ?
उत्तर: यह पंक्तियाँ बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ की कविता “सम्भाषण” से ली गई हैं। इन पंक्तियों में कवि एक काल कोठरी में कैद है और चाँद का मानवीकरण करते हुए उसे एक मित्र की तरह प्रस्तुत किया गया है। चाँद काल कोठरी के जंगले से झाँकता है और कवि से हँसते हुए पूछता है कि वह किस प्रकार पागलों की तरह बैठा है। इन पंक्तियों के माध्यम से कवि अपनी स्थिति का वर्णन करता है कि वह कैद में है और उसकी मानसिक स्थिति कुछ पागल जैसी हो गई है। चाँद का यह व्यंग्यात्मक सवाल कवि की दयनीय स्थिति को उजागर करता है और इसे हल्के-फुल्के हास्य के माध्यम से व्यक्त करता है।
10. कैसे ? बैठा हूँ मैं ऐसे-
कि मैं बन्द हूँ गगन-विहारी;
पागल-सा हूँ? तो फिर ? यह तो
कह हारी दुनिया बेचारी;
उत्तर: इन पंक्तियों में कवि अपने पागल होने के सवाल का उत्तर देता है। वह कहता है कि वह गगन-विहारी है, यानी एक ऐसा व्यक्ति है जो आकाश में विचरण करता है, लेकिन अब वह एक काल-कोठरी में कैद है। इस कैद ने उसे मानसिक रूप से असंतुलित कर दिया है। कवि स्वीकार करता है कि शायद वह पागल हो गया है, लेकिन वह इसे दुनिया की असफलता मानता है, न कि अपनी। यहां कवि ने समाज और उसकी सीमाओं पर कटाक्ष किया है, जो उसे समझने में असफल रहा है और उसकी स्वतंत्रता को छीन लिया है। यह दुनिया की बेचारगी पर व्यंग्य करता है जो उसे पागल कहती है।
11. मियाँ चाँद, गर मैं पागल हूँ-
तो तू है पगलों का राजा;
मेरी तेरी खूब छनेगी,
आ जँगले के भीतर आ जा;
उत्तर: इन पंक्तियों में कवि चाँद से संवाद करता हुआ कहता है कि अगर वह पागल है, तो चाँद पागलों का राजा है। यह एक मजाकिया लेकिन गहरा बयान है जिसमें कवि अपनी मानसिक स्थिति और चाँद की स्थिति को समान रूप से पागलपन की स्थिति मानता है। वह चाँद से कहता है कि अगर वह पागल है, तो उनकी आपस में अच्छी निभेगी। कवि उसे जँगले के भीतर आने के लिए कहता है, ताकि दोनों पागल मिलकर साथ रहें। इस तरह की कल्पनाशीलता और चाँद से संवाद करना कवि के भीतर की घुटन और उसकी आंतरिक दुनिया की झलक देता है, जहाँ वह अकेलेपन और मानसिक पीड़ा से गुजर रहा है।
12. लेकिन तू भी यार फँसा है-
इस चक्कर के गन्नाटे में;
इसीलिए तू मारा-मारा-
फिरताहै है इस सन्नाटे में;
उत्तर: इन पंक्तियों में कवि चाँद की स्थिति पर टिप्पणी करता है। वह कहता है कि चाँद भी उसी प्रकार एक चक्कर में फंसा हुआ है और इसलिए वह इस सन्नाटे में मारा-मारा फिरता है। यहां कवि चाँद की स्थिति को अपनी स्थिति के समान देखता है। वह चाँद को भी एक प्रकार से कैदी मानता है, जो आकाश में हमेशा घूमता रहता है, लेकिन कहीं स्थिर नहीं हो पाता। यह पंक्तियाँ जीवन की उस सच्चाई को प्रकट करती हैं कि सभी किसी न किसी प्रकार के बंधनों में बंधे हुए हैं, चाहे वह कवि हो या चाँद। इस प्रकार यह विचारशील व्यंग्य चाँद के माध्यम से जीवन की अनिश्चितता और कैद को दर्शाता है।
13. गर मंजूर घूमना ही है,
तो तूजरा निकलने दे दिन;
यह सुन वह आदाब बजाता-
खिसक गया डण्डे के नीचे;
उत्तर: इन पंक्तियों में कवि चाँद को कहता है कि अगर घूमना ही मंजूर है, तो दिन के निकलने का इंतजार किया जाए। जब दिन निकलेगा, तब घूमने का सही समय होगा। कवि की इस बात को सुनकर चाँद आदाब करता है और धीरे-धीरे वहां से खिसक जाता है। यह पंक्तियाँ एक तरह से जीवन की व्यस्तताओं और दिनचर्या पर कटाक्ष करती हैं, जहां रात में घूमने का कोई तात्पर्य नहीं है। कवि ने चाँद के माध्यम से यह संदेश दिया है कि जीवन में सही समय और परिस्थितियों का महत्व होता है, और बिना किसी उद्देश्य के भटकने से कुछ हासिल नहीं होता। चाँद का आदाब करना और चले जाना इस संवाद को समाप्त करता है, लेकिन यह कवि की मानसिक यात्रा और संघर्षों का गहरा प्रतिबिंब छोड़ जाता है।
बहुविकल्पीय प्रश्न
वसन्त (MCQs)
1. कवि ने किस वृक्ष की डालियों का जिक्र किया है?
(क) नीम
(ख) आम
(ग) पीपल
(घ) बबूल
उत्तर: (ग) पीपल
2. कवि ने किस समय का वर्णन किया है?
(क) सुबह
(ख) दोपहर
(ग) रात
(घ) साँझ
उत्तर: (घ) साँझ
3. कवि ने पत्तियों का कौन-सा रंग देखा था?
(क) काली
(ख) सुनहली-हरियाली
(ग) लाल
(घ) नीली
उत्तर: (ख) सुनहली-हरियाली
4. सूरज डूबने के बाद पत्तियाँ किस रंग की हो गईं?
(क) सफ़ेद
(ख) लाल
(ग) काली
(घ) नीली
उत्तर: (ग) काली
5. कवि के जीवन का कौन-सा पहलू छिन-छिन में बदलता है?
(क) ध्वनि
(ख) उजियाली-अँधियाली
(ग) सुख
(घ) रंग
उत्तर: (ख) उजियाली-अँधियाली
सम्भाषण (MCQs)
1. कवि ने किससे संवाद किया है?
(क) सूरज
(ख) चाँद
(ग) तारे
(घ) बादल
उत्तर: (ख) चाँद
2. चाँद ने कवि से किस स्वर में पूछा?
(क) उदास होकर
(ख) नाराज़ होकर
(ग) हँसकर
(घ) रोते हुए
उत्तर: (ग) हँसकर
3. कवि ने चाँद को किस उपाधि से सम्बोधित किया?
(क) बुद्धिमान
(ख) राजा
(ग) पागलों का राजा
(घ) सेनापति
उत्तर: (ग) पागलों का राजा
4. कवि ने चाँद को क्या सुझाव दिया?
(क) रात में घूमने का
(ख) दिन निकलने पर घूमने का
(ग) सोने का
(घ) तारे गिनने का
उत्तर: (ख) दिन निकलने पर घूमने का
5. कवि की काल-कोठरी में चाँद किसके नीचे से खिसक गया?
(क) पेड़ के
(ख) जँगले के
(ग) डण्डे के
(घ) दरवाज़े के
उत्तर: (ग) डण्डे के