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भारतवर्ष: NBSE Class 9 Alternative Hindi (हिन्दी) notes

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Get notes, summary, questions and answers, MCQs, extras, and PDFs of Chapter 3 “भारतवर्ष (Bharatvarsh)” which is part of Nagaland Board (NBSE) Class 9 Alternative Hindi answers. However, the notes should only be treated as references and changes should be made according to the needs of the students.

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सारांश (Summary)

‘भारतवर्ष’ (Bharatvarsh) कविता जयशंकर प्रसाद (Jaishankar Prasad) द्वारा रचित है। इसमें भारत की महानता और उसके गौरवशाली अतीत का वर्णन किया गया है। हिमालय के आँगन में जैसे ही सूर्य की पहली किरणें पड़ीं, उषा ने भारत का अभिनन्दन किया। लेखक ने बताया है कि भारत ने विश्व को जागरूक करने का प्रयास किया, जिससे अंधकार समाप्त हो गया और संसार में प्रकाश फैल गया।

कविता में ऋषि दधीचि के त्याग का उल्लेख है, जिन्होंने अपनी अस्थियाँ दान की थीं, जिससे इन्द्र ने वज्र बनाया। इस त्याग को भारत के इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है। राम द्वारा समुद्र पर पुल बांधने की घटना का भी उल्लेख है, जिससे निर्वासित होने के बाद भी उनके उत्साह का परिचय मिलता है। इस तरह के कई पौराणिक और ऐतिहासिक घटनाओं के माध्यम से भारत के साहस और उदारता को दर्शाया गया है।

लेखक ने बताया है कि भारत ने हमेशा धर्म और शांति का संदेश दिया, जिससे बलि जैसी क्रूर प्रथाएँ बंद हो सकीं। बुद्ध और अशोक जैसे सम्राटों ने लोगों को करुणा और शांति का मार्ग दिखाया। अशोक जैसे सम्राट, जिन्होंने भिक्षु बनकर धर्म का प्रचार किया, उनकी महानता का वर्णन किया गया है।

कविता में यह भी बताया गया है कि भारतीयों ने प्रलय जैसी कठिनाइयों का भी हँसते हुए सामना किया और हमेशा वीरता और नम्रता का परिचय दिया। भारतवासी वीर, दयालु और सत्यनिष्ठ थे, और उनके हृदय में अतिथि देवता समान थे। लेखक इस बात पर जोर देते हैं कि वही रक्त, वही साहस, और वही ज्ञान आज भी हमारे अंदर विद्यमान है।

अंत में, कवि कहता है कि हमें गर्व है कि हम भारतीय हैं और हमें अपने सम्पूर्ण अस्तित्व को इस पवित्र भारतवर्ष के लिए समर्पित करना चाहिए।

पंक्ति दर पंक्ति (Line by line) स्पष्टीकरण

हिमालय के आँगन में उसे प्रथम किरणों का दे उपहार
उषा ने हँस अभिनन्दन किया और पहनाया हीरक-हार।

हिमालय के आँगन का अर्थ है कि भारतवर्ष की भूमि हिमालय की गोद में बसी है। सुबह की पहली किरणें हिमालय के आँगन में आकर भारतवर्ष को उपहार के रूप में दी जाती हैं। उषा, यानी सुबह का समय, हंसते हुए इस उपहार का स्वागत करती है और भारतवर्ष को हीरे जैसा चमकता हार पहनाती है। यहाँ हीरक-हार का मतलब है कि भारत को प्रकृति ने अपने सौंदर्य से अलंकृत किया है।

जगे हम लगे जगाने विश्व लोक में फैला फिर आलोक
व्योम-तम-पुंज हुआ तब नष्ट अखिल संसृति हो उठी अशोक।

जब भारत जागा तो उसने पूरे विश्व को जागृत करने का कार्य किया। विश्व में चारों ओर ज्ञान का प्रकाश फैल गया। ‘व्योम-तम-पुंज’ का अर्थ है आकाश में फैला अंधकार, जो भारत के जागृत होने से नष्ट हो गया। अखिल संसृति यानी संपूर्ण सृष्टि इस प्रकाश से प्रसन्न हो उठी और आनंदित हो गई। यहाँ कवि यह कहना चाहता है कि भारतवर्ष के ज्ञान और शिक्षा ने पूरे विश्व को प्रकाशमान किया।

सुना है दधीचि का वह त्याग हमारी जातीयता विकास
पुरन्दर ने पवि से है लिखा अस्थि-युग का मेरे इतिहास।

दधीचि का त्याग बहुत महान था, उन्होंने अपनी हड्डियाँ दान कर दीं ताकि देवताओं को अस्त्र बनाने में मदद मिल सके। यह त्याग हमारे जातीयता के विकास की पहचान है। ‘पुरन्दर’ का अर्थ है इंद्रदेव, जिन्होंने दधीचि की हड्डियों से वज्र (अस्त्र) बनाया। अस्थि-युग का इतिहास यानी दधीचि का त्याग हमारे इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है, जो बलिदान और साहस का प्रतीक है।

सिन्धु-सा विस्तृत और अथाह एक निर्वासित का उत्साह
दे रही अभी दिखायी भग्न मग्न रत्नाकर में वह राह।

यहाँ ‘निर्वासित’ से तात्पर्य राम से है, जिनका वनवास काल था। उनका साहस और संकल्प सिन्धु (समुद्र) की तरह विस्तृत और अथाह था। समुद्र पर पुल बाँधने का साहसिक कार्य आज भी उस मार्ग को दिखाता है जो रत्नाकर (समुद्र) में बंधा था। यहाँ कवि ने समुद्र पर पुल बांधने की घटना को राम के साहस के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया है।

धर्म का ले-लेकर जो नाम हुआ करती बलि कर दी बन्द
हमीं ने दिया शान्ति-सन्देश सुखी होते देकर आनन्द।

कवि कहता है कि धर्म के नाम पर होने वाली बलि को बंद कराने में भारत का योगदान है। भारत ने शांति का संदेश दिया और लोगों को सुखी होने का मार्ग दिखाया। यहाँ बलि का मतलब है प्राचीन समय में धर्म के नाम पर की जाने वाली पशु-बलि, जिसे रोकने का कार्य भारत के महापुरुषों ने किया।

विजय केवल लोहे की नहीं धर्म की रही धरा पर धूम
भिक्षु होकर रहते सम्राट् दया दिखलाते घर-घर घूम।

यहाँ कवि कहता है कि विजय केवल शस्त्र (लोहे) से ही नहीं होती, बल्कि धर्म और सच्चाई से भी विजय पाई जा सकती है। सम्राट अशोक इसका उदाहरण हैं, जिन्होंने युद्ध के बाद अहिंसा का मार्ग अपनाया और धर्म का प्रचार करते हुए भिक्षु के रूप में घर-घर जाकर दया का संदेश दिया।

जातियों का उत्थान – पतन आँधियाँ झड़ी प्रचण्ड समीर
खड़े देखा झेला हँसते प्रलय में पले हुए हम वीर।

इस पंक्ति में कवि कहता है कि भारतवासी विभिन्न जातियों के उत्थान और पतन को आँधियों की तरह झेल चुके हैं। उन्होंने प्रचण्ड समीर (तेज हवा) की तरह हर विपत्ति का सामना किया और प्रलय की परिस्थितियों में भी वीरता से हँसते हुए खड़े रहे। इसका मतलब है कि भारतवासी हर चुनौती का सामना साहस के साथ करते आए हैं।

चरित के पूत भुजा में शक्ति नम्रता रही सदा सम्पन्न
हृदय के गौरव में था गर्व किसी को देख न सके विपन्न।

इसका अर्थ है कि भारतवासियों का चरित्र पवित्र रहा है। उनकी भुजाओं में शक्ति होने के बावजूद, वे नम्रता से भरे रहते हैं। उनके हृदय में गर्व होने के बावजूद वे किसी भी जरूरतमंद व्यक्ति को देखकर असहाय महसूस नहीं करते थे। यहाँ कवि भारतीयों की उदारता और विनम्रता की बात कर रहे हैं।

हमारे संचय में था दान अतिथि थे सदा हमारे देव
वचन में सत्य हृदय में तेज प्रतिज्ञा में रहती थी ठेव।

इस पंक्ति का अर्थ है कि हमारे समाज में संचय करने के बजाय दान करने की परंपरा रही है। अतिथि को देवता माना गया है और उनके स्वागत में कोई कमी नहीं रखी जाती थी। भारतीयों के वचन में सच्चाई, हृदय में तेज और प्रतिज्ञा में दृढ़ता रहती थी।

वही है रक्त वही है देश वही साहस है वैसा ज्ञान
वही है शान्ति वही है शक्ति वही हम दिव्य आर्य-सन्तान।

इस पंक्ति में कवि कहता है कि हमारे पूर्वजों का वही खून, वही देश, वही साहस और वही ज्ञान आज भी हमारे अंदर है। हमारी शांति, हमारी शक्ति भी वैसी ही है, क्योंकि हम उसी दिव्य आर्य-संतान हैं।

जियें तो सदा उसी के लिए यही अभिमान रहे यह हर्ष
निछावर कर दें हम सर्वस्व हमारा प्यारा भारतवर्ष।

यहाँ कवि ने अपने देशप्रेम को व्यक्त किया है। वह कहता है कि हम सदा अपने देश के लिए जिएं, यही हमारा गर्व और हर्ष है। हमें अपना सर्वस्व, अपना सब कुछ, अपने प्यारे भारतवर्ष के लिए निछावर कर देना चाहिए।

यह कविता भारत के गौरवशाली इतिहास, उसके नैतिक मूल्यों, और उसके महान त्याग एवं साहस की महिमा का वर्णन करती है।

पाठ्य प्रश्न और उत्तर (textual questions and answers)

मौखिक प्रश्न

1. उन पंक्तियों को पढ़कर सुनाइये जिनमें निम्नलिखित ऐतिहासिक -पौराणिक घटनाओं का उल्लेख हुआ है।

(क) इन्द्र द्वारा वज्र बनाना।

उत्तर: “पुरन्दर ने पवि से है लिखा अस्थि-युग का मेरे इतिहास।”

(ख) राम के द्वारा समुद्र पर पुल बाँधना।

उत्तर: “दे रही अभी दिखायी भग्न मग्न रत्नाकर में वह राह।”

(ग) गौतम बुद्ध का शान्ति और अहिंसा का सन्देश।

उत्तर: “हमीं ने दिया शान्ति-सन्देश सुखी होते देकर आनन्द।”

(घ) सम्राट् अशोक का भिक्षु बनकर धर्म-प्रचार करना।

उत्तर: “भिक्षु होकर रहते सम्राट् दया दिखलाते घर-घर घूम।”

2. ‘एक निर्वासित’ किसे कहा है? उसके उत्साह का कौन-सा प्रमाण आज भी दिखायी दे रहा है?

उत्तर: ‘एक निर्वासित’ से तात्पर्य भगवान राम से है। उनके उत्साह का प्रमाण समुद्र पर बनाया गया पुल है जो आज भी दिखायी दे रहा है।

3. धर्म के नाम पर होनेवाली बलि बन्द कराने में किसका योगदान था?

उत्तर: धर्म के नाम पर होनेवाली बलि बन्द कराने में गौतम बुद्ध का योगदान था।

लिखित प्रश्न

1. उषा ने भारत का अभिनन्दन किस प्रकार किया ?

उत्तर: हिमालय के आँगन में उसे प्रथम किरणों का दे उपहार, उषा ने हँस अभिनन्दन किया और पहनाया हीरक-हार।

2. दधीचि का त्याग क्या था ? उसे भारत के ‘अस्थि-युग का इतिहास’ क्यों कहा गया ?

उत्तर: दधीचि का त्याग वह था जब उन्होंने देवताओं को अपनी अस्थियाँ दान कर दी थीं। इन्हीं अस्थियों से इन्द्र ने वज्र बनाया था। इसे ‘अस्थि-युग का इतिहास’ इसलिए कहा गया क्योंकि यह त्याग एक महान बलिदान था जिससे देवताओं को विजय प्राप्त हुई थी।

3. भारतवासियों को ‘प्रलय में पले वीर’ क्यों कहा गया है ?

उत्तर: भारतवासियों को ‘प्रलय में पले वीर’ इसलिए कहा गया है क्योंकि उन्होंने अनेक आपदाओं और कठिनाईयों का सामना किया है और उनमें पले-बढ़े हैं। आँधियों और प्रचण्ड समीर जैसी स्थितियों को भी हँसते हुए झेला है।

4. कविता के आधार पर प्राचीन भारत की चारित्रिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिये।

उत्तर:

  • दानशीलता: हमारे संचय में दान था, अतिथि सदा देव माने जाते थे।
  • सत्यनिष्ठा: वचन में सत्य था, हृदय में तेज था।
  • साहस और ज्ञान: वही साहस है, वैसा ही ज्ञान है।
  • शान्ति और शक्ति का संतुलन: शान्ति और शक्ति दोनों में ही संतुलन था।

5. निम्नलिखित पंक्तियों की व्याख्या कीजिये-

(क) जगे हम लगे जगाने विश्व …….. हो उठी अशोक।

उत्तर: उत्तर: जगे हम लगे जगाने विश्व लोक में फैला फिर आलोक, व्योम-तम-पुंज हुआ तब नष्ट अखिल संसृति हो उठी अशोक। इस पंक्ति में बताया गया है कि भारतवासियों ने न केवल स्वयं जागरण किया बल्कि पूरे विश्व को जागरित करने का प्रयास भी किया। उनकी कोशिशों से चारों ओर आलोक फैल गया और अज्ञानता का अंधकार नष्ट हो गया। इससे संपूर्ण सृष्टि में एक शांति और सुख का माहौल उत्पन्न हो गया।

(ख) विजय केवल लोहे की नहीं धर्म की रही धरा पर धूम।

उत्तर: विजय केवल लोहे की नहीं धर्म की रही धरा पर धूम। इस पंक्ति में यह बताया गया है कि भारत की विजय केवल हथियारों की ताकत पर आधारित नहीं रही, बल्कि धर्म, सत्य और न्याय के बल पर भी विजय पाई गई। यहाँ धर्म की महत्ता को लोहे की शक्ति से भी ऊपर रखा गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भारत ने हमेशा मानवता और करुणा को अपने मूल्यों में सर्वोपरि माना।

(ग) वही है रक्त…..दिव्य आर्य-सन्तान।

उत्तर: वही है रक्त वही है देश वही साहस है वैसा ज्ञान, वही है शान्ति वही है शक्ति वही हम दिव्य आर्य-सन्तान। इस पंक्ति में कवि ने यह दर्शाया है कि आज भी हमारे भीतर वही प्राचीन साहस, ज्ञान, शांति, और शक्ति मौजूद है जो हमारे पूर्वजों के समय थी। कवि ने आर्य-संतान होने के गौरव को व्यक्त करते हुए यह बताया है कि हम उन्हीं दिव्य गुणों से संपन्न हैं जो हमारे पूर्वजों में थे। इसी कारण हमें अपने देश और उसकी महान परंपराओं पर गर्व करना चाहिए।

6. भारतवर्ष कविता का मूल भाव लगभग दस वाक्यों में लिखिये।

उत्तर: इस कविता में कवि ने भारतवर्ष की महानता का वर्णन किया है। उन्होंने हिमालय की प्रथम किरणों से लेकर दधीचि के त्याग तक की चर्चा की है। भारत ने अपने ज्ञान और धर्म से पूरे विश्व को आलोकित किया है। यहाँ की संस्कृति ने सदैव शान्ति और प्रेम का संदेश दिया है। भारत की विजय केवल सैन्य शक्ति पर ही आधारित नहीं रही, बल्कि धर्म और सत्य की विजय भी रही है। भारतवासी कठिनाइयों में पले हैं और उन्होंने हर प्रकार की विपत्ति का सामना साहस के साथ किया है। अतिथि देवता के समान थे और सत्यनिष्ठा यहाँ की विशेषता थी। हमारे पूर्वजों का साहस, ज्ञान, शान्ति और शक्ति हमारे रक्त में भी है। कवि ने इस कविता में भारतवर्ष के प्रति प्रेम और गर्व का अभिमान प्रकट किया है और इसे सर्वोच्च मानते हुए अपना सर्वस्व अर्पण करने की इच्छा व्यक्त की है।

7. कविता से ऐसी चार पंक्तियाँ चुनिये जो आपको सबसे अच्छी लगे। अच्छा लगने का कारण भी बताइये।

उत्तर:

  • “वही है रक्त वही है देश वही साहस है वैसा ज्ञान।”
  • “धर्म का ले-लेकर जो नाम हुआ करती बलि कर दी बन्द।”
  • “विजय केवल लोहे की नहीं धर्म की रही धरा पर धूम।”
  • “जियें तो सदा उसी के लिए यही अभिमान रहे यह हर्ष।”

अच्छा लगने का कारण: इन पंक्तियों में भारतवर्ष के प्रति गर्व, धार्मिक मूल्यों का सम्मान, और नैतिक विजय का चित्रण किया गया है। ये पंक्तियाँ भारत की महानता, शान्ति और शक्ति का सुंदर वर्णन करती हैं।

योग्यता-विस्तार

‘भारत की महानता’ विषय पर एक अनुच्छेद लिखिये।

उत्तर: भारत की महानता उसके महान इतिहास, संस्कृति और आध्यात्मिकता में निहित है। यह देश हजारों वर्षों से ज्ञान, विज्ञान, कला और धर्म का केंद्र रहा है। भारत ने विश्व को अहिंसा, सहनशीलता, और मानवता का संदेश दिया है। यहां के महान संतों और ऋषियों ने समाज को सत्य, दया और करुणा का मार्ग दिखाया। भारतवर्ष का इतिहास गौरवशाली रहा है जिसमें दधीचि जैसे महान त्यागी और सम्राट अशोक जैसे शान्ति-दूत हुए हैं। इस देश ने सदा ही आत्मबल, साहस और अध्यात्मिक ज्ञान को प्राथमिकता दी है। भारतीय संस्कृति में सदा से अतिथि देवो भव: की भावना रही है। यहाँ की महानता सिर्फ भौतिक विजय में नहीं बल्कि आध्यात्मिकता और धर्म की विजय में है।

भाषा-अभ्यास

1. नीचे लिखे अनेक शब्दों के स्थान पर एक शब्द लिखिये

(क) पथ पर चलनेवाला

उत्तर: पथिक

(ख) राह पर चलनेवाला

उत्तर: यात्री

(ग) देखने योग्य

उत्तर: दर्शनीय

(घ) जिसका परिचय न हो

उत्तर: अपरिचित

(ङ) उच्च कुलवाला

उत्तर: कुलीन

(च) जिसमें धैर्य न हो

उत्तर: अधीर

(छ) जानने का इच्छुक

उत्तर: जिज्ञासु

(ज) लज्जा न करनेवाला

उत्तर: निर्लज्ज

(झ) जो नीति को जानता हो

उत्तर: नीतिज्ञ

2. नीचे लिखे अंग्रेजी वाक्यों का हिन्दी में अनुवाद कीजिये-

Once upon a time there was an old man who lived in a little house. He was gentle and honest. He spent his days working in field and forest. He was very kind and helpful. Therefore all the animals and birds loved him very much.

उत्तर: कभी एक समय की बात है, एक बूढ़ा आदमी था जो एक छोटे से घर में रहता था। वह बहुत सज्जन और ईमानदार था। वह अपने दिन खेत और जंगल में काम करने में बिताता था। वह बहुत दयालु और मददगार था। इसलिए सभी जानवर और पक्षी उससे बहुत प्यार करते थे।

3. नीचे लिखे वाक्यों को शुद्ध कीजिये-

(क) ओबेद ने मिठाई खाया।

उत्तर: ओबेद ने मिठाई खाई।

(ख) मैं मेरे घर जाऊँगा।

उत्तर: मैं अपने घर जाऊँगा।

(ग) वह मुझको एक किताब दिया।

उत्तर: उसने मुझे एक किताब दी।

(घ) आपका बहन क्या कर रहा है।

उत्तर: आपकी बहन क्या कर रही है?

(ङ) कल हमने ताजमहल देखने गये।

उत्तर: कल हम ताजमहल देखने गए।

अतिरिक्त (extras)

प्रश्न और उत्तर (questions and answers)

1. उषा ने भारत का अभिनन्दन किस प्रकार किया?

उत्तर: उषा ने प्रथम किरणों का दे उपहार भारत का अभिनन्दन किया और हीरक-हार पहनाया।

2. दधीचि का त्याग क्या था? उसे भारत के ‘अस्थि-युग का इतिहास’ क्यों कहा गया?

उत्तर: दधीचि ने अपने अस्थि का त्याग किया था जिससे इन्द्र के वज्र का निर्माण हुआ। इस त्याग को भारत के ‘अस्थि-युग का इतिहास’ इसलिए कहा गया क्योंकि यह त्याग हमारे जातीयता के विकास का प्रतीक है।

3. भारतवासियों को ‘प्रलय में पले वीर’ क्यों कहा गया है?

उत्तर: भारतवासियों को ‘प्रलय में पले वीर’ इसलिए कहा गया है क्योंकि वे आँधियों, झड़ियों और प्रचंड समीर को हंसते हुए सहते रहे और उन कठिन परिस्थितियों में भी वीर बने रहे।

4. धर्म के नाम पर होनेवाली बलि बन्द कराने में किसका योगदान था?

उत्तर: धर्म के नाम पर होनेवाली बलि बन्द कराने में भारतवासियों का योगदान था। उन्होंने शांति-सन्देश दिया और सुखी होते हुए आनंद प्रदान किया।

5. कविता के आधार पर प्राचीन भारत की चारित्रिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिये।

उत्तर:

  • भारतवासी वीरता से प्रलय का सामना करते थे।
  • उनकी भुजाओं में शक्ति और नम्रता थी।
  • वे दानशील थे और अतिथियों का स्वागत देवता की तरह करते थे।
  • उनके वचन में सत्यता, हृदय में तेज और प्रतिज्ञा में दृढ़ता थी।

6. ‘विजय केवल लोहे की नहीं धर्म की रही धरा पर धूम’ का अर्थ क्या है?

उत्तर: इस पंक्ति का अर्थ है कि भारत में विजय केवल युद्ध और ताकत से ही नहीं, बल्कि धर्म और नैतिकता के आधार पर भी हासिल की जाती रही है।

7. ‘वही है रक्त वही है देश वही साहस है वैसा ज्ञान’ का अर्थ समझाइए।

उत्तर: इस पंक्ति का अर्थ है कि आज भी भारतीयों में वही साहस और ज्ञान है जो प्राचीन काल में था। भारतीयों में शांति और शक्ति का वही संतुलन है जो उनकी दिव्य आर्य-संतान होने का प्रतीक है।

8. ‘एक निर्वासित’ किसे कहा गया है? उसके उत्साह का कौन-सा प्रमाण आज भी दिखायी दे रहा है?

उत्तर: ‘एक निर्वासित’ राम को कहा गया है, जिन्होंने समुद्र पर पुल बांधा था। उसका उत्साह आज भी समुद्र में दिखायी दे रहा है।

9. कविता से ऐसी चार पंक्तियाँ चुनिए जो आपको सबसे अच्छी लगे।

उत्तर:

  • “हमारे संचय में था दान अतिथि थे सदा हमारे देव।”
  • “विजय केवल लोहे की नहीं धर्म की रही धरा पर धूम।”
  • “चरित के पूत भुजा में शक्ति नम्रता रही सदा सम्पन्न।”
  • “वही है रक्त वही है देश वही साहस है वैसा ज्ञान।”

अच्छा लगने का कारण: इन पंक्तियों में भारत के गौरव, त्याग, दानशीलता, और शक्ति का सुन्दर वर्णन किया गया है।

10. भारतवर्ष कविता का मूल भाव लगभग दस वाक्यों में लिखिए।

उत्तर: ‘भारतवर्ष’ कविता में भारत की महानता और उसके गौरवशाली इतिहास का वर्णन है। हिमालय की प्रथम किरणों से भारत का अभिनन्दन हुआ। दधीचि के त्याग, राम के पुल-निर्माण, और बुद्ध के शांति-संदेश की बात की गई है। भारत ने धर्म और शांति का संदेश दिया। यहां के लोगों में शक्ति, नम्रता, और दानशीलता थी। वे कठिन परिस्थितियों में भी वीरता से खड़े रहे। धर्म के नाम पर बलि रोकने में भी उनका योगदान था। कविता में भारतीय संस्कृति की उदारता और महानता का वर्णन किया गया है।

इस प्रकार की प्रश्नोत्तर शैली से आपकी मांग अनुसार रटे जाने वाले तथ्य आधारित प्रश्नों का निर्माण किया गया है। यदि और प्रश्नों की आवश्यकता हो, तो कृपया बताएं।

11. हिमालय के आँगन में उसे प्रथम किरणों का दे
उपहार उषा ने हँस अभिनन्दन किया और पहनाया हीरक-हार।

उत्तर: इस पंक्ति में कवि जयशंकर प्रसाद ने भारतवर्ष की महिमा और प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन किया है। यहाँ हिमालय पर्वत को ‘आँगन’ के रूप में प्रस्तुत किया गया है और कहा गया है कि उषा, जो सुबह की पहली किरणों का प्रतीक है, ने भारत का स्वागत किया। उषा ने हिमालय की ऊँचाइयों को मानो हीरे जैसा चमकता हुआ हार पहनाया हो। इस चित्रण में भारत की भव्यता और सुंदरता को महान पर्वतों और उषा की किरणों से दर्शाया गया है, जो इस देश की महिमा को बढ़ाती है। यह दृश्य न केवल प्राकृतिक सौंदर्य को दर्शाता है, बल्कि भारत की पौराणिक और सांस्कृतिक गरिमा को भी उजागर करता है।

12. सुना है दधीचि का वह त्याग हमारी जातीयता विकास
पुरन्दर ने पवि से है लिखा अस्थि-युग का मेरे इतिहास।

उत्तर: इस पंक्ति में कवि ने दधीचि के त्याग का उल्लेख किया है। ऋषि दधीचि ने अपने शरीर की हड्डियों का त्याग किया था ताकि उनसे इन्द्र के लिए वज्र का निर्माण हो सके। इस त्याग से भारत के लोगों की आत्मोत्सर्ग और दूसरों के कल्याण के लिए अपने प्राणों की आहुति देने की भावना को प्रकट किया गया है। ‘अस्थि-युग का इतिहास’ का अर्थ है कि हमारे देश का इतिहास आत्म-बलिदान और त्याग से भरा हुआ है। इस त्याग को हमारे जातीयता के विकास का प्रतीक माना गया है। यहाँ पर दधीचि का उदाहरण देकर भारत की महान संस्कृति और त्याग की परंपरा को उजागर किया गया है।

13. विजय केवल लोहे की नहीं धर्म की रही धरा
पर धूम भिक्षु होकर रहते सम्राट् दया दिखलाते घर-घर घूम।

उत्तर: इस पंक्ति में कवि ने धर्म की विजय और शांति के संदेश को प्रमुखता दी है। कवि का कहना है कि भारत की विजय केवल युद्ध और तलवार के माध्यम से नहीं, बल्कि धर्म और शांति के प्रचार से हुई है। सम्राट अशोक का उदाहरण लिया गया है, जिन्होंने कलिंग युद्ध के बाद हिंसा त्यागकर बौद्ध धर्म को अपनाया और शांति व दया का संदेश फैलाने का कार्य किया। वे एक सम्राट होते हुए भी भिक्षु बनकर देशभर में घूमे और लोगों को दया और करुणा का महत्व समझाया। यह भारत की महान परंपरा को दर्शाता है, जिसमें शक्ति से अधिक धर्म और नैतिकता को महत्व दिया गया है।

14. खड़े देखा झेला हँसते प्रलय में पले हुए हम वीर।

उत्तर: इस पंक्ति में कवि ने भारतवासियों की सहनशक्ति और वीरता का उल्लेख किया है। कवि का कहना है कि भारतवासी प्रलय जैसी कठिन परिस्थितियों में भी खड़े रहे और उन्होंने उन्हें हंसते हुए सहा। वे प्रचंड आँधियों और विपत्तियों से कभी भी पीछे नहीं हटे। इस प्रकार भारतवासियों की सहनशक्ति, धैर्य और वीरता का गुणगान किया गया है। यह दर्शाता है कि चाहे कितनी भी विपत्ति क्यों न आ जाए, भारतीय लोग हमेशा वीरता के साथ उसका सामना करने के लिए तत्पर रहते हैं।

15. हमारे संचय में था दान अतिथि थे सदा हमारे
देव वचन में सत्य हृदय में तेज प्रतिज्ञा में रहती थी ठेव।

उत्तर: इस पंक्ति में कवि ने भारतीय समाज की उदारता और महानता का वर्णन किया है। हमारे पूर्वज हमेशा दानशील रहे हैं और अतिथियों को देवता के रूप में मानते रहे हैं। यहाँ ‘अतिथि देवो भव’ की परंपरा को दर्शाया गया है, जहाँ मेहमानों का स्वागत देवताओं की तरह किया जाता था। इसके साथ ही, भारतीयों के वचन में सत्यता और उनके हृदय में साहस की बात की गई है। प्रतिज्ञा में दृढ़ता और सत्यता उनके चरित्र का हिस्सा रही है। इस प्रकार कवि ने भारतीय समाज के नैतिक मूल्यों और सद्गुणों को उजागर किया है।

16. वही है रक्त वही है देश वही साहस है
वैसा ज्ञान वही है शान्ति वही है शक्ति वही हम दिव्य आर्य-सन्तान।

उत्तर: इस पंक्ति में कवि ने आधुनिक भारत के लोगों में वही पुरातन गुण होने की बात कही है जो प्राचीन आर्य-संतानों में थे। यहाँ पर कवि कह रहे हैं कि हमारे अंदर वही साहस, वही ज्ञान, वही शक्ति और वही शांति है जो हमारे पूर्वजों में थी। कवि इस पंक्ति के माध्यम से यह संदेश देना चाहते हैं कि हमें अपने पूर्वजों की महानता और उनके गुणों पर गर्व करना चाहिए और उन्हें बनाए रखना चाहिए। हमारे रक्त में वही वीरता और वही गौरवशाली इतिहास है जो हमें महान बनाता है।

17. जियें तो सदा उसी के लिए यही अभिमान रहे
यह हर्ष निछावर कर दें हम सर्वस्व हमारा प्यारा भारतवर्ष।

उत्तर: इस पंक्ति में कवि ने अपने देशप्रेम को व्यक्त किया है। कवि कहते हैं कि यदि हमें जीना है तो केवल अपने प्यारे भारतवर्ष के लिए ही जीना चाहिए। हमें इस पर गर्व और खुशी होनी चाहिए कि हमारा जीवन भारतवर्ष के लिए समर्पित है। यहाँ कवि का संदेश है कि हमें अपनी मातृभूमि के लिए अपना सर्वस्व त्यागने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। इस प्रकार कवि ने अपने देशप्रेम और भारत की महानता को व्यक्त करते हुए सभी को अपने देश के प्रति निष्ठा और समर्पण का संदेश दिया है।

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

1. किसने इन्द्र के वज्र के निर्माण में योगदान दिया?

(क) दधीचि
(ख) राम
(ग) अशोक
(घ) बुद्ध

उत्तर: (क) दधीचि

2. भारतवर्ष में शान्ति का संदेश किसने फैलाया था?

(क) अशोक
(ख) दधीचि
(ग) बुद्ध
(घ) राम

उत्तर: (ग) बुद्ध

3. समुद्र पर पुल बाँधने का कार्य किसने किया?

(क) बुद्ध
(ख) राम
(ग) अशोक
(घ) दधीचि

उत्तर: (ख) राम

4. सम्राट अशोक ने क्या बनकर धर्म प्रचार किया था?

(क) सैनिक
(ख) भिक्षु
(ग) राजा
(घ) साधु

उत्तर: (ख) भिक्षु

5. भारतवर्ष कविता में “निर्वासित” किसे कहा गया है?

(क) बुद्ध
(ख) अशोक
(ग) राम
(घ) दधीचि

उत्तर: (ख) अशोक

6. “प्रलय में पले वीर” किसे कहा गया है?

(क) भारतीय
(ख) अशोक
(ग) बुद्ध
(घ) राम

उत्तर: (क) भारतीय

7. भारतवर्ष कविता में उषा ने भारत का अभिनन्दन किस प्रकार किया?

(क) पुष्प देकर
(ख) हीरक हार पहनाकर
(ग) तिलक लगाकर
(घ) दीप जलाकर

उत्तर: (ख) हीरक हार पहनाकर

8. धर्म के नाम पर होनेवाली बलि बन्द कराने में किसका योगदान था?

(क) अशोक
(ख) बुद्ध
(ग) राम
(घ) दधीचि

उत्तर: (ख) बुद्ध

9. कविता के अनुसार विजय किसकी होती है?

(क) लोहे की
(ख) धन की
(ग) धर्म की
(घ) सेना की

उत्तर: (ग) धर्म की

10. दधीचि का त्याग किससे संबंधित था?

(क) वज्र
(ख) धन
(ग) भूमि
(घ) समुद्र

उत्तर: (क) वज्र

11. भारतवासियों के हृदय में कौन सी भावना रही है?

(क) गर्व
(ख) क्रोध
(ग) दुःख
(घ) भय

उत्तर: (क) गर्व

12. अतिथि को क्या माना गया है?

(क) भगवान
(ख) शत्रु
(ग) मित्र
(घ) गुरु

उत्तर: (क) भगवान

13. कविता के अनुसार भारतवर्ष का मुख्य उद्देश्य क्या है?

(क) विजय
(ख) त्याग
(ग) सेवा
(घ) सम्मान

उत्तर: (ख) त्याग

14. भारतवर्ष कविता में किस गुण को प्रमुखता दी गई है?

(क) साहस
(ख) लालच
(ग) क्रोध
(घ) आलस्य

उत्तर: (क) साहस

15. कविता में “वचन में सत्य” किसके लिए कहा गया है?

(क) भारतीयों के लिए
(ख) अशोक के लिए
(ग) बुद्ध के लिए
(घ) राम के लिए

उत्तर: (क) भारतीयों के लिए

Ron'e Dutta

Ron'e Dutta

Ron'e Dutta is a journalist, teacher, aspiring novelist, and blogger who manages Online Free Notes. An avid reader of Victorian literature, his favourite book is Wuthering Heights by Emily Brontë. He dreams of travelling the world. You can connect with him on social media. He does personal writing on ronism.

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